Jagat MaMa -जगत मामा

एक ऐसा राजा जिसे तलवारों से ज्यादा लड़कियों की चोलियाँ अच्छी लगती थी

आज जगत मामा आपको एक गज़ब खबर बताता हैं  जिसे सुनकर आप भी सोचेंगे की क्या राजा था यार ! तो सुनिओ

भारत में मुग़ल बादशाहों का एक अलग अंदाज रहा है. बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां, औरंगजेब और आखिरी बहादुर शाह जफ़र. सब के सब किसी ना किसी चीज के लिए जाने जाते हैं. पर इन सबकी चकाचौंध में भारत ने एक मुग़ल बादशाह को भुला दिया, जो इन सबसे जुदा थे.

१७१९ में मुग़ल सम्राज्य के आखरी दौर में एक शासक बैठा जो मोहम्मद शाह रंगीला के नाम से मशहूर हुआ और इसी नाम से इतिहास में अमर हो गया ! ये एक बेवक़ूफ़ , शराबी ,नसेड़ी ,और अय्याशी करने वाल शख्स था , बादशाह बनते ही इस ने उल जुलूल हरकते शुरू कर दी .वो क़ानून तोड़ने और बनने में माहिर था .

वह किसी को भी हिंदुस्तान का सब से बड़ा पोस्ट सौंप देता दूसरे ही पल उसे उठा कर जेल में दाल देता.वो जब चाहता जिस वजीर को जेल भेज देता . वह अक्सर दरबार में नग्न अवस्था मै आ जाता .उनके बारे में जब भी लिखा गया, उनका मजाक बनाया गया. क्योंकि वो चंगेज खान, नादिरशाह और औरंगजेब वाले सांचे में फिट नहीं बैठते थे. तलवार की बजाय उन्हें लड़कियों के कपड़े और शायरी ज्यादा प्रिय थी. मुहम्मद शाह नाम था उनका. पर इतिहास उन्हें मुहम्मद शाह रंगीला के नाम से जानता है. वो बादशाह, जिनके नाम पर दिल्ली में एक सड़क तक नहीं है.

औरंगजेब से बिल्कुल उल्टे थे रंगीला

औरंगजेब के मरने के बाद हिंदुस्तान में राजशाही बड़ी खतरनाक हो गई थी. तीन बादशाहों का क़त्ल हो गया था. एक को तो अंधा कर दिया गया था. वजीर बादशाहों को नचाते थे. इसके पहले औरंगजेब ने तो दिल्ली राज की बत्ती गुल कर दी थी. पूरे जीवन लड़ते रहे. मरे भी लड़ाई के बीच. पर मुग़लिया शासन के कल्चर को ध्वस्त कर के गए थे.

गीत-संगीत, साहित्य, नाच-गाना सब बर्बाद कर के गए थे. जो कलाकार मुगलिया राज में ऐश करते थे, औरंगजेब के राज में भीख मांगने की नौबत आ गई. मुहम्मद शाह रंगीला बिल्कुल अलग थे. रंगीला बादशाह के हर तरह के चित्र बनाये गए. यहां तक कि सेक्स करते हुए भी तस्वीरें हैं. उस वक़्त का ये बादशाह अपनी सोच में कितना आगे था!

मस्त कट रही थी जिन्दगी

अपने लगभग 30 साल के राज में रंगीला ने खुद कोई लड़ाई नहीं छेड़ी. मस्ती में जीवन निकलता था. सुबह-सुबह कभी मुर्गों की लड़ाई. कभी घुड़दौड़. दिन में तरह-तरह के संगीत. फिर इश्क-मुहब्बत. तरह-तरह के कलाकारों को अपने पास बिठाना. बातें करना. बादशाह के बारे में कहा जाता है कि वो लड़कियों के कपड़े पहन नाचते थे. पर इसमें बुरा क्या था?

ये नृत्य के प्रति उनका असीम इश्क था. एक बादशाह का वैसा करना थर्ड जेंडर के लोगों के लिए बड़ा ही सुकून वाला रहा होगा. ये भी कहा जाता है कि जब मुगलिया राज का अकूत पैसा देख नादिर शाह अपने लश्कर के साथ चला आया, तब अपना बादशाह आराम फरमा रहा था. जब हरकारा चिट्ठी लेकर बादशाह के पास आया, तो बादशाह ने उस चिट्ठी को दारू के अपने प्याले में डुबो दिया और बोले “इस बिना मतलब की चिट्ठी को नीट दारू में डुबा देना बेहतर है.”

तभी आ गया जालिम नादिरशाह, कोहिनूर के लिए जिन्दगी मैं आग लगाने

जब नादिर दिल्ली के पास पहुंचा, तो बादशाह रंगीला अपनी फ़ौज के साथ खड़े थे दो-दो हाथ करने के लिए. साथ ही सन्देश भी
भिजवा दिया कि चाहो तो बात कर लो. बात हुई. तय हुआ कि लड़ाई नहीं होगी. नादिर पैसे लेकर लौट जायेगा. डिप्लोमेसी की ये मिसाल थी. जहां हर बात का फैसला तलवार से होता था, बादशाह ने बात से निपटा दिया. पर बादशाह के एक धोखेबाज़ सेनापति ने नादिर से कहा कि इनके पास बहुत पैसा है. सस्ते में छूट रहे हैं. नादिर अड़ गया कि हम को दिल्ली की मेहमानी चाहिए. दिल्ली आ गया. लगा सोना-चांदी उठाने. तीन दिन पड़ा रहा.

फिर बादशाह के एक वजीर ने नादिर से बात कर ली. पता नहीं क्या बात की कि नादिर जाने को तैयार हो गया. जब जाने की बेला आई, तब बादशाह रंगीला नादिर को रुखसत करने गए. वहां नादिर ने गले लगाया. भूल-चूक लेनी-देनी की. और बोला: बादशाह, हमारे यहां रिवाज है कि जाते वक़्त हम अमामे बदल लेते हैं. तो आप मुझे अपना मुकुट दे दो, मेरा ले लो. बादशाह को काटो तो खून नहीं. बादशाह ने कोहिनूर अपने मुकुट में छुपा रखा था. वजीर ने यही बात बताई थी नादिर को. ये बात कहानी भी हो सकती है. इतिहास कहानियों में भी चलता है.

 

 

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