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अनोखा पेड़ जहाँ मन्नत के लिए बांधे जाते हैं – दोने

आज हम आपको गज़ब न्यूज़ मैं जो बताने जा रहे हैं उस पर शायद आपको यकीन नही होगा और आप भी कहेंगे वाह क्या गज़ब पोस्ट है|

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दोने वाले बाबा का पेड़ जिसके बारे मैं सबको नही पता, फिर भी जो जानते हैं वो यह आकर दोने लगाते हैं. किवदंती हैं की – कई साल पहले एक सन्यासी बाबा ने यहाँ अपनी कुटिया लगई थी. वो यह कुटिया में पूजा आदि करते और शाम के समय भिक्षा के लिए निकलते थे. कहते हैं वो जिस को नज़र उठा कर देख लेते थे वो धन्य हो जाता था और उसकी मनोकामना पूरी हो जाती थी.

वो अपने लिए खाने का प्रबंध दोने में भिक्षा मांगकर करते थे. वो प्रतिदिन एक ही घर से भिक्षा लेते थे. रोज की तरह एक समय शाम को जब वो भिक्षा मांगने नगर सेठ के दरवाजे पर गये, लेकिन उस समय नगर सेठ की पत्नी घर पर नही थी, सन्यासी बाबा ने आवाज़ लगायी तो नगर सेठ ने अनसुना कर दिया. साधू बाबा ने फिर आवाज़ दी तो सेठ को गुस्सा आ गया वो बाहर आया और उनका भिक्षा पात्र तोड़ दिया. साधू बाबा वहां से बिना कुछ कहे चले गये. जब नगर सेठ की पत्नी घर आई तो नगर सेठ ने यह बात अपनी पत्नी को बताई, सेठ की पत्नी दोड कर वहाँ पहुंची जहाँ साधू बाबा की कुटिया थी पर साधू बाबा अंतर्ध्यान हो गये थे, अब वहां कोई नही था और उस जगह एक पेड़ निकल आया था.

done wala ped

नगर सेठ की पत्नी ने माफ़ी मांगने के रूप में एक दोना बनवा कर वह उस पेड़ पर लगा दिया. रात को साधू बाबा ने सेठ की पत्नी को दर्शन दिए और उन्हें माफ़ कर के पुत्र प्राप्ति का वर दिया. नगर सेठ के उसके बाद एक पुत्र हुआ, पर आगे की पीढ़ियों के कहीं और बस जाने के कारण यहाँ रखरखाव के अभाव में झाड़ियाँ निकल आई हैं,

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पर जो भक्त इस जगह का महत्व जानते हैं वो इस घने जंगल में इस पेड़ को पहचान लेते हैं. पूर्णिमा के दिन यहाँ ज्यादा भक्त आते हैं. उनका मानना हैं की बाबा अब भी उनको आशीर्वाद देते हैं. वो मनोकामना पूरी करने की प्राथना के साथ इस पेड़ पर दोने लगाते हैं, पहले पुराने चलने वाले दोने लगते थे अब पत्ते वाले दोने के अभाव में नए ज़माने के दोने लगाते हैं.

इस पेड़ की ख़ास बात यह हैं की यह सब के दोने पेड़ पर नही लगते कहा जाता है की जिस पर बाबा की दया होती है उसकी के दोने पेड़ पर लगते हैं.

यह पेड़ माउन्ट अबू की पहाड़ियों मैं गुरुशिखर पर जाते समय रास्ते में हैं (जैसा हमे बताया गया है)

हमारा उद्देश्य अंधविश्वास को बढ़ावा देना नही हैं, यह लोगो की श्रधा भी हो सकती है और अन्धश्र्दा पर यह भारत की भूमि साक्षी रही है इस तरह के चमत्कारों की. आगे आपका भरोसा.

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